कब होगा न्याय …?

देहरादून; देहरादून के परेड ग्राउंड में उत्तराखंड के तमाम बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं लेकिन इन दिनों परेड ग्राउंड पर राज्य के लगभग सभी निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्र धरने पर बैठे हैं . उनके धरने को तीन हफ़्ते हो गए हैं . इन छात्रों की मांग है कि 2015 का उत्तराखंड सरकार का वो शासनादेश वापस लिया जाए जिसमें प्राइवेट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों की फीस 80 हज़ार से बढ़ाकर 2 लाख 15 हज़ार करने का निर्देश दिया गया था . आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक फीस बढ़ाना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है . ये अधिकार शुल्क निर्धारण कमेटी को है जो हर राज्य में हाइकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित होती है लेकिन राज्य सरकार ने इसकी परवाह किए बगैर शासनादेश जारी कर दिया ।

आयुष के छात्र जो पिछले 20 दिनों से गांधीवादी तरीके से बापू के बताये अहिंसा के मार्ग पर शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर बैठे थे,आज उनके साथ पुलिसकर्मियों ने बदतमीजी की। एक छात्र फिलहाल ICU में एडमिट है।भगवान करे कोई अनहोनी न हो।अबे अब कुछ तो शर्म करो,कोर्ट का आदेश तो मनवा नही पाये,पूंजीपतियों के आगे हाथे खड़े कर दिये,अब पुलिस का प्रयोग कर रहे हो. कम से कम लड़कियों में तो बल प्रयोग न करते । दुर्भाग्य उत्तराखंड का..

आयुर्वेद के असंख्य संगठन कहा सो रहे है?
जब आयुर्वेद एलोपैथ की भट्टी में अपने मतलब की भस्म का मारण करना हो तब सभी पहुच जाते है, और जब हमारे छात्र-छात्राओं को आपकी जरूरत है अपने हक को हासिल करने मे तब कोई साथ नहीं है?आयुर्वेद परम्परा की अगली पीढ़ी आमरण अनशन पर है जिसमें भावी चिकित्सक प्रगति जोशी की हालत नाजुक हो चली है, आपका हृदय जरा भी विचलित नहीं होता?
समय है चेत जाइए, आगे आकर बच्चों के भविष्य की चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन पर दबाव बनाए ताकि कोई अनहोनी होने के पहले व्यवस्था ठीक हो सके!उत्तराखंड के मठाधीशों से विनम्र निवेदन है, इस कठिन समय मे छात्रों का साथ दे तथा प्रशासन पर उचित प्रशासनिक कार्यवाही हेतु दबाव बनाए!!

ये लाठियाँ हिटलरशाही से ज्यादा तानाशाही की याद है…..
दुनिया भर में आप गाँधीवाद का ज्ञान देते घुम रहे हो…लेकिन मोदी जी आपकी ही एक सरकार कुछ उधोगपतियों को बचाने के लिए आयुष डॉ पर लाठी चार्ज कर रही है,ये आयुर्वेद के इतिहास के लिए एक काला दिन है|
आज आपने हमारे आयुर्वेद साथियों पर जो लाठियाँ चलायी है,वो लाला लाजपतराय पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा चलायी गयी लाठियो की याद दिला रही है||इस घटना पर अंग्रेजी हुकूमत और मोदी जी आपकी हुकूमत मे हमें कोई फर्क नजर नहीं आ रहा है|
80,000 से सीधे तीन लाख फीस….क्या यही है आपका रामराज्य???
क्या राष्ट्रवाद के नारों से हमारा पेट भरेगा???
क्या आज आप सता के लोभ मे इतने बङे हो गये हो की देश के न्यायालय का आदेश भी नहीं मानेंगे?
क्या आज आप सता के लोभ में देश की जनता से भी बङे हो गये हो?
कुछ शर्म आनी चाहिए….उतराखण्ड सरकार…ना भुले इन लाठियों ने कभी अंग्रेजो का सूर्यास्त करवा दिया था आपकी तो औकात ही क्या है…..
देश के समस्त आयुर्वेद चिकित्सक इस घटना की निंदा करते है…हम सभी आज हमारे साथियों के साथ खङे है|


आज लाठियाँ उतराखण्ड में चली है कल हम पर भी चल तो सकती है!!! आओ हम सब हमारे साथियों के साथ हुई निंदनीय घटना के विरोध मे आयुर्वेद दिवस का बहिष्कार करे|आयुर्वेद के लोग ही सुरक्षित नहीं है तो फिर किसलिए आयुर्वेद दिवस और किनके लिए आयुर्वेद दिवस ????सरकारे बंद करे आयुर्वेद के नाम पर अपनी दुकान चलाना…
कभी तो सुरज निकलेगा….
कभी तो मेरा घर रोशन होगा…
जय आयुर्वेद
जय धनवंतरी

Courtesy :-APTA AYURVEDA News Desk & Save Ayurveda

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